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दोस्ती फेम सुधीर कुमार (मृत्यु)

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सुधीर कुमार ⚰️12 जनवरी 1993 मराठी परिवार से आए सुधीर कुमार सावंत ने दोस्ती फिल्म के अलावा संत ज्ञानेश्वर, जीने की राह और घर ची रानी फिल्मों में काम किया. राजश्री बैनर के ताराचंद बड़जात्या ने उनके साथ तीन साल का कॉन्ट्रेक्ट किया था. भारतीय सिनेमा के दोस्ती फेम अभिनेता सुधीर कुमार को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए: एक श्रद्धांजलि  सुधीर कुमार (जन्म तिथि NA - 12 जनवरी 1993) या सुधीर कुमार सावंत, जैसा कि उन्हें भी जाना जाता है, एक अभिनेता थे जो फिल्म "दोस्ती" (1964) के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते थे, सत्येन बोस द्वारा निर्देशित एक ब्लैक-एंड-व्हाइट हिंदी फिल्म, ताराचंद बड़जात्या द्वारा निर्मित और राजश्री प्रोडक्शंस द्वारा वितरित। दोस्ती बंगाली फिल्म लालू भुलु (1959) की रीमेक है। उनके नामों के कारण उन्हें हमेशा खलनायक अभिनेता "सुधीर" के साथ गलत समझा जाता था। सुरेश सरवैया द्वारा संकलित सुधीर कुमार का जन्म बॉम्बे में हुआ था, उनका पूरा नाम सुधीर कुमार सावंत है। वह एक महाराष्ट्रियन थे और लालबाग, परेल, बॉम्बे में रहते थे।  सुधीर के परिवार में उनके माता-पिता, एक बड़ी बहन शोभा और ...

अमरीश पुरी (मृत्यु)

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अमरीश पुरी  🎂22 जून 1932 ⚰️12 जनवरी 2005 चरित्र अभिनेता मदन पुरी के छोटे भाई अमरीश पुरी हिन्दी फिल्मों की दुनिया का एक प्रमुख स्तंभ रहे है। अभिनेता के रूप निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फ़िल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले श्री पुरी ने बाद में खलनायक के रूप में काफी प्रसिद्धी पायी। उन्होंने १९८४ में बनी स्टीवेन स्पीलबर्ग की फ़िल्म "इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ़ डूम" (अंग्रेज़ी- Indiana Jones and the Temple of Doom) में मोलाराम की भूमिका निभाई जो काफ़ी चर्चित रही। इस भूमिका का ऐसा असर हुआ कि उन्होंने हमेशा अपना सिर मुँडा कर रहने का फ़ैसला किया। इस कारण खलनायक की भूमिका भी उन्हें काफ़ी मिली। व्यवसायिक फिल्मों में प्रमुखता से काम करने के बावज़ूद समांतर या अलग हट कर बनने वाली फ़िल्मों के प्रति उनका प्रेम बना रहा और वे इस तरह की फ़िल्मों से भी जुड़े रहे। फिर आया खलनायक की भूमिकाओं से हटकर चरित्र अभिनेता की भूमिकाओं वाले अमरीश पुरी का दौर। और इस दौर में भी उन्होंने अपनी अभिनय कला का जादू कम नहीं होने दिया फ़िल्म मिस्टर इंडिया के एक संवाद "मोगैम्बो खुश हुआ" किसी व्यक्ति का खल...

अरुण गोविल (जन्म)

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अरुण गोविल 🎂12 जनवरी 1958  एक भारतीय अभिनेता, निर्माता और निर्देशक हैं। उन्होंने हिंदी, भोजपुरी, ब्रज भाषा, उड़िया और तेलुगु फिल्मों में अभिनय किया है। उन्हें रामानंद सागर की हिट टेलीविजन श्रृंखला रामायण (1986) में भगवान राम की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने प्रशांत नंदा की पहेली (1977) से बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की। कनक मिश्रा की 'सावन को आने दो' (1979) और सत्येन बोस की 'सांच को आंच नहीं' (1979) में काम करने के बाद उन्हें स्टारडम मिला। उन्होंने रामानंद सागर की विक्रम और बेताल (1985) से छोटे पर्दे पर शुरुआत की। इसके बाद उन्हें सागर की बेहद सफल टीवी श्रृंखला रामायण (1986) में भगवान राम की भूमिका दी गई, जिसके लिए उन्होंने 1988 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की प्रमुख भूमिका श्रेणी में अपट्रॉन पुरस्कार जीता। उन्होंने सागर के लव कुश में राम की अपनी भूमिका दोहराई। राम की भूमिका ने उन्हें बहुत प्रसिद्धि दिलाई और इसके परिणामस्वरूप उन्हें अन्य प्रसिद्ध भूमिकाएं निभाने का मौका मिला, जैसे टीवी धारावाहिक विश्वामित्र में हरिश्चंद्र या टीवी धारावाहिक बुद्ध में बुद्ध की भूमिका...

साक्षी तंवर (जनम)

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साक्षी तंवर साक्षी तंवर भारतीय टेलीविजन और बॉलीवुड अभिनेत्री हैं। उन्हें मुख्यतः बालाजी टेलीफ़िल्म्स द्वारा निर्मीत टीवी धारावाहिकों कहानी घर घर की और बड़े अच्छे लगते हैं में क्रमशः पार्वती अग्रवाल और प्रिया कपूर के अभिनय के लिए जाना जाता है। उन्होंने विभिन्न टेलीविजन धारावाहिकों, रियलिटी शो और फ़िल्मों में अभिनय किया है। साक्षी तंवर जन्म 12 जनवरी 1973 अलवर, राजस्थान, भारत आवास मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत राष्ट्रीयता भारतीय पेशा मॉडल, अभिनेत्री, टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता तंवर ने अपना करियर एक टेलीविजन प्रोग्राम में ऐंकर के रूप में 1990 में आरम्भ किया। उनका प्रथम टीवी धारावाहिक दस्तूर था। उसके बाद उन्होंने विभिन्न टेलीविजन धारावाहिकों में कार्य किया। उनका मुख्य अभिनय कहानी घर घर की नामक धारावाहिक में देखने को मिला जिसे बहुत ही सफलता मिली और यह धारावाहिक 2000 से 2008 तक लगातार आठ वर्षों तक चला। उन्होंने इसमें एक महिला पहलवान, पार्वती अग्रवाल का अभिनय किया है। साक्षी ने दंगल (फ़िल्म) , मोहल्ला अस्सी और बड़े अच्छे लगते हैं, करले तू भी मोहब्बत में भी भूमिका निभाई है। 2015 में साक्षी साक्षी को सर्...

कुमार गंधर्व (मृत्यु)

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कुमार गंधर्व जन्म नाम शिवपुत्र सिद्धराम कोमकाली जन्म 8 अप्रैल 1924[1] सुलेभवी, बेलगाम, कर्णाटक, भारत निधन जनवरी 12, 1992 (उम्र 67 वर्ष) देवास, भारत विधायें भारतीय शास्त्रीय संगीत ,हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पेशा गायक सक्रियता वर्ष 1934-1992 शिवपुत्र सिद्धरामैया कोमकाली 🎂जन्म 08 अप्रॅल, 1924 जन्म भूमि धारवाड़, कर्नाटक ⚰️मृत्यु 12 जनवरी, 1992 मृत्यु स्थान देवास, मध्य प्रदेश संतान मुकुल (पुत्र), कलापिनी (पुत्री) कर्म भूमि भारत कर्म-क्षेत्र शास्त्रीय गायन मुख्य रचनाएँ उड़ जाएगा हंस अकेला..., बोर चेता.., झीनी-झीनी चदरिया..., सुनता है गुरु ज्ञानी... आदि। विषय शास्त्रीय संगीत पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण प्रसिद्धि हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक नागरिकता भारतीय अन्य जानकारी लोक संगीत को शास्त्रीय से भी ऊपर ले जाने वाले कुमार जी ने कबीर को जैसा गया वैसा कोई नहीं गा सकेगा। जीवन परिचय कुमार गंधर्व का जन्म कर्नाटक के धारवाड़ में 8 अप्रॅल 1924 को हुआ। और पुणे में प्रोफेसर देवधर और अंजनी बाई मालपेकर से संगीत की शिक्षा पाई। शिवपुत्र जन्म जात गायक थे। दस वर्ष की आयु से ही संगीत समारोहों में गाने लगे थे औ...

सी राम चन्द्र (जनम)

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सी रामचंद्र🎂12 जनवरी 1918⚰️05 जनवरी 1982 रामचन्द्र नरहर चितलकर  12 जनवरी 1918  पुणतांबा, अहमदनगर जिला, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत  निधन 5 जनवरी 1982 (आयु 63 वर्ष)  मुंबई, महाराष्ट्र, भारत  अन्य नाम सी.  रामचन्द्र, चितलकर, अन्ना साहब, व्यवसाय, फ़िल्म, संगीतकार, फ़िल्म निर्माता, सक्रिय वर्ष 1935 – 1971 सी रामचंद्र 🎂12 जनवरी 1918, पुणतांबा ⚰️: 05 जनवरी 1982, मुम्बई भारत के फिल्म उद्योग के एक प्रसिद्ध संगीतकार थे। संगीतकार की भूमिका में उन्होंने अधिकतर सी नाम का प्रयोग किया। हालाँकि, रामचन्द्र ने अन्नासाहेब (फिल्मों बहादुर प्रताप, मतवाले और मददगार में), राम चितलकर (फिल्मों सुखी जीवन, बदला, मिस्टर में) नामों का भी इस्तेमाल किया था। झटपट, बहादुर, और दोस्ती), और श्यामू (फिल्म ये है दुनिया में)। इसके अलावा, वह अक्सर आर नाम से मराठी फिल्मों में गाते और अभिनय करते थे। एन। चितलकर. एक सामयिक पार्श्व गायक के रूप में अपने करियर के लिए उन्होंने केवल अपने उपनाम चितलकर का उपयोग किया। चितलकर ने लता के साथ कुछ प्रसिद्ध और अविस्मरणीय युगल गीत गाए जैसे फिल्म आज़ाद में क...

अहमद फ़राज़

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#12jan #25aug  महान शायर अहमद फ़राज़ के यौम-ए-वफ़ात पर दिली खिराज़-ए-अकीदत 🎂अहमद फ़राज़ की पैदाइश 12 जनवरी 1931 (कुछ लोगों ने इनकी पैदाइश का साल 1934 भी बताया है) ⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 25 अगस्त 2008, इस्लामाबाद, पाकिस्तान कितना आसाँ था तेरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते झेले हैं जो दुःख तूने ‘फ़राज़’ अपनी जगह हैं पर तुम पे जो गुज़री है वो औरों से कम है घर से निकले थे कि दुनिया ने पुकारा था ‘फ़राज़’ अब जो फुर्सत मिले दुनिया से तो घर जाएँ कहीं उंगलियाँ आज तक इसी सोच में गुम हैं “फ़राज़” उसने कैसे नए हाथ को थामा होगा जब भी दिल खोल के रोए होंगे, लोग आराम से सोए होंगे वो सफ़ीने जिन्हें तूफ़ाँ न मिले, नाख़ुदाओं ने डुबोए होंगे तुम तक़ल्लुफ़ को भी इख़लास समझते हो ‘फ़राज़’ दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला जी में जो आती है कर गुज़रो कहीं ऐसा न हो कल पशेमाँ हों कि क्यों दिल का कहा माना नहीं वो ज़िन्दगी हो कि दुनिया ‘फ़राज़’ क्या कीजे कि जिससे इश्क़ करो बेवफ़ा निकलती है ज़िन्दगी पर इससे बढ़कर तंज़ क्या होगा ‘फ़राज़’, उसका ये कहना कि तू शायर है, दीवाना नहीं। बहुत अजीब है ये...

अमरीश पुरी

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#22jun  #12jan  Amrish Puri अमरीश पुरी 🎂जन्म की तारीख और समय: 22 जून 1932, नवांशहर ⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 12 जनवरी 2005, Hinduja Hospital OPD Building, मुम्बई बच्चे: नम्रता पुरी, राजीव पुरी पत्नी: उर्मिला दिवेकर (विवा. 1957–2005) भाई: मदन पुरी, चमन पुरी, हरीश सिंह पुरी, चंद्रकांता मेहरा अमरीश पुरी (जन्म:22 जून 1932 -मृत्यु:12 जनवरी 2005 चरित्र अभिनेता मदन पुरी के छोटे भाई अमरीश पुरी हिन्दी फिल्मों की दुनिया का एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं। अभिनेता के रूप निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फ़िल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले श्री पुरी ने बाद में खलनायक के रूप में काफी प्रसिद्धी पायी। उन्होंने १९८४ में बनी स्टीवेन स्पीलबर्ग की फ़िल्म "इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ़ डूम" (अंग्रेज़ी- Indiana Jones and the Temple of Doom) में मोलाराम की भूमिका निभाई जो काफ़ी चर्चित रही। इस भूमिका का ऐसा असर हुआ कि उन्होंने हमेशा अपना सिर मुँडा कर रहने का फ़ैसला किया। इस कारण खलनायक की भूमिका भी उन्हें काफ़ी मिली। व्यवसायिक फिल्मों में प्रमुखता से काम करने के बावज़ूद समांतर या अलग हट कर बनने वाल...