मुबारक बेगम

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मुबारक बेगम
🎂05 जनवरी 1936, सुजानगढ़
⚰️ 18 जुलाई 2016, जोगेश्वरी पश्चिम, मुम्बई
एल्बम: Genius Of Mubarak Begum, Varsha Ritu Hindi Modern Songs
मुबारक़ बेग़म भारत की हिन्दी फ़िल्मों में पार्श्व गायिका रही हैं। फ़िल्मों में आने से पहले इनहोंने आकाशवाणी में भी काम किया। इनका जन्म राजस्थान के चूरू ज़िले के सुजानगढ़ कस्बे में हुआ था। उन्होने मुख्य तौर पर वर्ष 1950 से 1970 के दशक के बीच बॉलीवुड के लिए सैकड़ों गीतों और गजलों को आवाज दी थी। उन्होंने वर्ष 1961 में आई फिल्म हमारी याद आएगी का सदाबहार गाना ‘कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आएगी’ को अपनी आवाज दी थी। वर्ष 1950 और 1960 के दशक के दौरान उन्होंने एस.डी. वर्मन, शंकर जयकिशन और खय्याम जैसे सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों के साथ काम किया। उनके अन्य प्रसिद्ध गाने ‘मुझको अपने गले लगा लो ओ मेरे हमराही’ और ‘हम हाल-ए-दिल सुनाएंगे’ हैं। निधन के पूर्व वे ग़रीबी की हालत में मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में अपनी बीमार बेटी और टैक्सी चालक बेटे के साथ रहती थी और पुराने दिनों को याद करती थी।

भारतीय हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका थीं। उन्होंने 1950 से 1970 के दशक के बीच बॉलीवुड के लिए सैकड़ों गीतों और ग़ज़लों को आवाज़ दी थी। वर्ष 1950 और 1960 के दशक के दौरान उन्होंने एस. डी. बर्मन, शंकर जयकिशन और खय्याम जैसे सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों के साथ काम किया था।

परिचय

हिन्दी सिनेमा की मशहूर पार्श्व गायिका मुबारक बेगम का जन्म 1935/1936 को राजस्थान के झुंझुनू में हुआ था। उनका पालन पोषण गुजरात के अहमदाबाद में हुआ। इसके बाद उनका पूरा परिवार मुम्बई आ गया। मुम्बई आकर उन्होंने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई।

शुरुआती_कॅरियर

मुबारक बेगम ने अपने कॅरियर की शुरुआत रेडियो से की थी। एक बार मशहूर संगीतकार रफ़ीक ग़ज़नवी ने रेडियो पर उनकी आवाज़ सुनी और उन्होंने अपनी फ़िल्म में उन्हें गाने का अवसर दिया। दुर्भाग्य से जब गाने के लिए मुबारक बेगम आईं तो स्टुडिओ में लोगों की भीड़ देखकर घबरा गईं। मौका ऐसे ही हाथ से चला गया। कुछ वर्षों बाद 1949 में उन्हें फिर अवसर आया फ़िल्म 'आइए' के लिए। इस बार बड़े आत्मविश्वास के साथ उन्होंने गाना गाया। बोल थे 'मोहे आने लगी अंगड़ाई। इसके बाद उन्हे लगातार काम मिलता रहा। सुनील दत्त, नरगिस और राजेन्द्र कुमार से उनके बहुत अच्छे रिश्ते रहे।

फ़िल्मी_कॅरियर

मुबारक बेगम ने 50 के दशक में अपने कॅरियर की शुरुआत रेडियो से की थी। फ़िल्मों में उन्हें पहला ब्रेक महज 13 साल की उम्र में संगीतकार नौशाद ने दिया था। उन्होंने फ़िल्म 'आइए' के लिए 'मोहे आने लगी अंगड़ाई' को अपनी आवाज़ दी। उन्होंने अपने तीन दशकों के लम्बे कॅरियर में एस. डी. बर्मन, शंकर जयकिशन, सलिल चौधरी और खय्याम जैसे दिग्गज संगीतकारों के लिए गीत गाए। लेकिन जल्दी ही वह फ़िल्मों में गाने लगीं, तब लता मंगेशकर भी अपने कॅरियर की शुरुआत कर रही थीं।

निधन

अपने समय में लाखों दिलों पर राज करने वाली पार्श्व गायिका मुबारक बेगम का लंबी बीमारी के बाद 18 जुलाई, 2016 80 वर्ष की उम्र में मुंबई के जोगेश्वरी स्थित अपने घर में निधन हो गया।

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ऐये (1949) (उनकी पहली फ़िल्म, संगीत शौकत अली नशाद का )
बसेरा (1950)
डोलती नैया (1950)
फूलों का हार (1951) ( हंसराज बहल का संगीत )
ममता (1952)
मोर्धवज (1952)
शीशा (1952)
चार चाँद (1953)
डेरा (1953)
धर्म पाटनी (1953)
अफ्रीका (1954)
आमिर (1954)
औलाद (1954)
चांदनी चौक (1954)
डाक बाबू (1954)
गवैया (1954)
गुल बहार (1954)
हर जीत (1954)
मान (1954)
रिश्ता (1954)
शबाब (1954) ( नौशाद का संगीत)
संगम (1954)
तातार के चोर (1954)
बारादरी (1955)
देवदास (1955) ( एसडी बर्मन द्वारा संगीत )
जासूस (1955)
पतित पावन (1955)
खानदान (1955)
कुंदन (1955)
रुखसाना (1955)
सौ का नोट (1955)
सखी लुटेरा (1955)
आन बान (1956)
आवारा शहज़ादी (1956)
बादल और बिजली (1956)
बगदाद का जादू (1956)
बागी सौदागर (1956)
ढोला मारू (1956)
फाइटिंग क्वीन (1956)
हरिहर भक्ति (1956)
जंगल क्वीन (1956)
लाल-ए-यमन (1956)
रंगीन रातें (1956)
सुल्ताना डाकू (1956)
फैशन (1957)
गेटवे ऑफ इंडिया (1957)
महारानी (1957)
पैसा (1957)
परवीन (1957)
पाताल परी (1957)
चेतक राणा प्रताप (1958)
जंगल प्रिंसेस (1958)
मधुमती (1958) ( सलिल चौधरी का संगीत )
सिम सिम मरजीना (1958)
बेहराम डाकू (1959)
चीनी जादूगर (1959)
माँ के आँसू (1959)
जालिम जादूगर (1960)
मुगल-ए-आज़म (1960)
मिस्टर सुपरमैन की वापसी (1960)
वीर दुर्गादास (1960)
अरब का सितारा (1961)
डाकू मंसूर (1961)
देखी तेरी बॉम्बे (1961)
जिप्सी गर्ल (1961)
हमारी याद आएगी (1961) (उनका सबसे लोकप्रिय फ़िल्मी गीत, संगीत स्नेहल भटकर का )
पिया मिलन की आस (1961)
शाही फ़रमान (1961)
जिंदगी और ख्वाब (1961)
कोबरा गर्ल (1963)
हमराही (1963) ( शंकर-जयकिशन द्वारा संगीत )
सुनहरे नागिन (1963)
ये दिल किसको दूं (1963)
आंधी और तूफान (1964)
बलमा बड़ा नादान (1964)
फ़रियाद (1964)
हमीर हाथ (1964)
कब हो हैं गवना हमार (1964)
मैजिक कार्पेट (1964)
मार्वल मैन (1964)
नैहर छूटल जाई (1964)
पहाड़ी नागिन (1964)
पुनर मिलन (1964)
कव्वाली की रात (1964)
शगून (1964)
टार्ज़न और कैप्टन किशोर (1964)
आरज़ू (1965)
ब्लैक एरो (1965)
खूनी खजाना (1965)
मैं हूँ जादूगर (1965)
मोहब्बत इसको कहते हैं (1965)
मोर मैन मितवा (1965)
काजल (1965)
टार्ज़न एंड द किंग काँग (1965)
गगोला (1966)
नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे (1966) ( मदन मोहन का संगीत)
प्रोफेसर और जादूगर (1966)
सुशीला (1966)
तीसरी कसम (1966)
ज़िम्बो को बेटा मिल गया (1966)
आवारा लड़की (1967)
दुनिया भर में (1967)
मेरा भाई मेरा दुश्मन (1967)
पूनम की चाँद (1967)
जुआरी (1968) ( कल्याणजी-आनंदजी द्वारा संगीत )
सरस्वतीचंद्र (1968)
हम एक हैं (1969)
चेतना (1970)
चंदन (1971)
अन्नदाता (1972)
एक बेचारा (1972)
चट्टान सिंह (1974)
सुबह जरूर आएगी (1977)
रामू तो दीवाना हैं (1980)
बहन (1980)
गंगा मांग रही बलिदान (1981)
नई इमारत (1981)

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