बिपिन बाबुल (जनम)
बाबुल🎂22 जनवरी 1926⚰️?
जब हम भारत के कुछ महान संगीतकारों का नाम लेते हैं तो अक्सर एक बात भूल जाते हैं
बिपन बाबुल की जोड़ी के बाबुल को अगर इनका नाम सुना भी होगा तो याद नहीं आ रहा होगा या फिर कुछ दशकों के लिए ये नाम जाने पहचाना सा लग रहा होगा।
भारतीय सिनेमा के विस्मृत संगीत निर्देशक बाबुल (संगीत जोड़ी बिपिन बाबुल) को उनकी जयंती पर याद करते हुए: एक श्रद्धांजलि
"बैठे हैं रहगुजर पर दिल का दिया जलाए...", "नसीब होगा मेरा मेहरबान कभी न कभी...", "ज़ुल्फ़ों की घटा लेकर सावन की परी आई...", "ये फूलों का गजरा ये सोलह सिंगार हो..." और हमें हाल-ए-दिल तुमसे कहना है..." गाने कौन नहीं याद रखता? क्या हम जानते हैं कि इन गानों का संगीत किसने बनाया है? और अगर आपको पता है कि ये गाने बाबुल या बिपिन बाबुल की जोड़ी ने बनाए हैं, तो आपको सलाम। ये गाने हमेशा से मेरे पसंदीदा रहे हैं। ये पुराने गाने नहीं हैं, बल्कि 1950 और 60 के दशक के हैं, वो दौर जिसके बारे में फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर के भावुक प्रेमी मानते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है।
संगीतकार बाबुल संगीत निर्देशक बाबुल का जन्म 22 जनवरी 1926 को हुआ था। बाबुल के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं मिली।
बाबुल द्वारा रचित फ़िल्में अपेक्षाकृत प्रसिद्ध हैं और लोकप्रिय फ़िल्मों में चालीस दिन (1959), रेशमी रूमल (1961), नकली नवाब (1962) शामिल हैं। सभी फ़िल्मों में कुछ बहुत अच्छे गाने थे और कम से कम उन गानों के लिए तो बाबुल को याद किया जाना चाहिए। लेकिन इनमें से किसी में भी
लता मंगेशकर का कोई गाना नहीं था।
एक जोड़ी के रूप में, बिपिन बाबुल ने बारह फ़िल्मों के लिए संगीत दिया। ज़्यादातर एक्शन/स्टंट फ़िल्में या कॉस्ट्यूम ड्रामा थीं। शाही मेहमान, सुल्ताना डाकू, जंगल प्रिंसेस, जंगल किंग, आदि। उनकी प्रसिद्ध फ़िल्मों में बादल और बिजली और चौबीस घंटे शामिल हैं, दोनों फ़िल्मों में कुछ मधुर गाने थे। "हमें हाल-ए-दिल तुम से कहना है..." 24 घंटे का एक लोकप्रिय ट्रैक है। दावत (1974) उनकी आखिरी फिल्म थी और इसमें दोनों ने मिलकर कुछ गाने भी लिखे थे। तलत महमूद, मुकेश, आशा भोसले, गीता दत्त, मुबारक बेगम ने उनके ज़्यादातर लोकप्रिय गाने गाए।
बाबुल की महत्वाकांक्षा गायक बनने की थी। मैरिस कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक, लखनऊ (जो अब भातखंडे संगीत संस्थान बन गया है) से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने विभाजन से पहले ऑल इंडिया रेडियो के लखनऊ, दिल्ली और लाहौर रेडियो स्टेशनों पर भी काम किया। लेकिन गायक के तौर पर उन्हें ज़्यादा अवसर नहीं मिले, इसलिए उन्होंने संगीत निर्देशन में कदम रखा। बिपिन दत्ता और बाबुल ने मदन मोहन के सहायक के तौर पर शुरुआत की, जिसके बाद उनकी दोस्ती हुई। उनकी पहली फ़िल्म सलाम-ए-मोहब्बत थी, उनकी पहली फ़िल्म शाही मेहमान (1955) थी। उन्होंने चंदू, चौबीस घंटे, बस कंडक्टर, जंगल किंग, रात के राही जैसी फ़िल्मों में संगीत दिया, उसके बाद वे अलग हो गए।
"चालीस दिन" (1959) विभाजन के बाद बाबुल द्वारा की गई पहली फिल्म थी और बिपिन ने फिल्म "क्या ये बंबई है" के लिए संगीत दिया था। इस पर अमीन सयानी ने एक कार्यक्रम किया
बिपिन बाबुल की जोड़ी में 1973 में किया गया बाबुल का एक साक्षात्कार शामिल है।
🎧 बिपिन बाबुल के यादगार गाने -
● मैं तुझको अगर एक फूल... सलाम-ए-
मोहब्बत (1955) तलत महमूद द्वारा
● चल धीरे-धीरे मतवाले... बादल और बिजली (1956) बाबुल, भूषण और कोरस द्वारा
● रात कितनी हसीन.. बादल और बिजली (1956) तलत महमूद, मुबारक बेगम द्वारा
● बिजली चमके...सुल्ताना डाकू (1956) मुबारक बेगम द्वारा
● तुम हो कहीं के... ताजपोशी (1957) आशा भोंसले द्वारा
● दुनिया मुझको पागल समझे... 24 घंटे (1958) द्वारा मुकेश
● हमें हाल-ए-दिल तुमसे कहना है... 24 घंटे - तलत महमूद, आशा भोंसले
🎧 बाबुल एकल संगीत निर्देशक के रूप में -
● गर्दिश में हो तारे... रेशमी रुमाल (1961) मुकेश द्वारा
● ज़ुल्फ़ों की घटा लेकर... रेशमी रुमाल (1961) मन्ना डे, आशा भोसले द्वारा
● जब छाये कभी सावन किम घटा... रेशमी रुमाल (1961) तलत महमूद द्वारा
● हैं ये ज़मीन हमारी... सारा जहाँ हमारा (1961) मुकेश द्वारा
● फूलों से रंगीन ज़मीन हैं... नकली नवाब (1962) मुकेश द्वारा
● हम जिसमें फ़िदा हैं... नक़ली नवाब (1962) आशा द्वारा भोसले
🎥 बिपिन बाबुल की जोड़ी की फिल्मोग्राफी -
1955 सलाम-ए-मुहब्बत, शाही मेहमान
1956 बादल और बिजली और सुल्ताना डाकू
1957 ताजपोशी
1958 चंदू और चौबीस घंटे
1959 बस कंडक्टर, 40 दिन और रात के राही
1960 डायमंड किंग
1961 रेशमी रुमाल
1962 नक़ली नवाब
1964 बागी शहजादा
1974 दावत
बाबुल🎂22 जनवरी 1926
जब हम भारत के कुछ महान संगीतकारों का नाम लेते हैं तो अक्सर एक बात भूल जाते हैं
बिपन बाबुल की जोड़ी के बाबुल को अगर इनका नाम सुना भी होगा तो याद नहीं आ रहा होगा या फिर कुछ दशकों के लिए ये नाम जाने पहचाना सा लग रहा होगा।
आज हम आपको ऐसे म्युज़िक डिरेक्टर से मिलवाएंगे जिसकी तस्वीर भी किसी के पास नहीं है
और न ही किसी ने उनकी जानकारी ही रखी पर क्लासिक में उनका भी बोल बाला था।इस
संगीतकार जोड़ी का नाम है बिपिन बाबुल
अगर किसी के पास बिपिन बाबुल की कोई तस्वीर हो तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। यहां हम उनकी कुछ दुर्लभ जानकारी आप के साथ साझा कर रहे हैं।
विपिन और बाबुल वे दोनों शुरुआती दिनों में मदन मोहन के असिस्टेंट हुआ करते थे आवाज की दुनिया में बाबुल का नाम मशहूर था गायक बनने से पहले बाबू लखनऊ के मौरिस म्यूजिक स्कूल में थे।वहां से ट्रेनिंग लेने के बाद लाहौर बस गए,आजादी के पहले वे लाहौर रेडियो में ही सक्रिय थे और लाहौर तथा पंजाब में बनने वाली फिल्मों में अपनी आवाज देते थे।उन्हें बाकी गायकों की तरह नामी हस्ती बनना था पर उसी बीच भारत का विभाजन हो गया और उनका सपना अधूरा रह गया। फिर भी उन्होंने हार मानी नहीं और भारत लौट आए।
मुंबई आने के बाद उन्हें ज्यादा काम मिला नहीं इसकी वजह यह थी कि उन्हें कोई पहचानता नहीं था इस कारण से बहुत सारे महीने उन्होंने बिना काम गुजारे उनके पास आमदनी का साधन भी नहीं था इस कारण से वे मदन मोहन के यहां असिस्टेंट बन गए।
यूनिस सौ इक्यावन की मदहोश और उन्नीस सौ पचपन की रेलवे प्लेटफॉर्म फिल्म में उन्होंने बतौर असिस्टेंट म्युज़िक डिरेक्टर काम किया।
चोवन के साल में मदन मोहन की पहचान विपिन से हुए वे बांसुरी बजाने में द बेस्ट थे उनकी कला को देख कर मदन मोहन ने उन्हें अपना असिस्टेंट बना लिया इसके बाद बिपिन और बाबुल एक दूसरे को पहचानने लगे।
आगे चलकर उन्होंने आजाद रहकर संगीत देने का फैसला लिया और दोनों ने मिलकर मदन मोहन की नौकरी छोड़ दी बतौर म्युज़िक डिरेक्टर बिपिन बाबुल की पहली फिल्म सलाम मे मोहब्बत थी जो साल उन्इस सौ पचपन में रिलीज हुई थी उसके अगले साल सुल्ताना डाकू और बादल और बिजली इन दो
फिल्मों में भी उन्होंने संगीत दिया इन तीनों फिल्मों ने ज्यादा जादू नहीं किया पर बाकी फिल्मकारों ने उन्हें नोटिस करना शुरू किया था उन्होंने यूनिस सौ अट्ठावन में रिलीज हुई चौबिस घंटे इस फिल्म के कारण बीपीएल बाबुल को असली पहचान मिली उस दौर के बड़े गायक रफी , आशा ,शमशाद और तलत महमूद ने उस फिल्म में आवाज दी थी
खास रूप से मुकेश द्वारा गाया हुआ ये गीत दुनिया मुझको पागल समझें या समझे आवारा बहुत प्रचलित हुआ मुकेश और आशा भोसले की आवाज से सजा गीत ऐसे बीना रूट हो तुम की जाना मुश्किल हो भी बहुत हिट साबित हुआ।
दरअसल विपिन बाबुल के चौबिस घंटे अकेली हिट फिल्म थी।
उसके बाद उन्होंने बस कंडक्टर, रात की रानी ,जंगल इन तीन फिल्मों में भी संगीत दिया ये फिल्म साल उन्नीस उनसठ में रिलीज हुई थी।
चौबिस घंटे फिल्म के अलावा उनइस सौ अट्ठावन में एक और फिल्म रिलीज हुई थी उस फिल्म का नाम था चंदू जिसमें महमूद और प्राण जैसे कलाकारों ने अभिनय किया था।
इस फिल्म के गाने भी लोकप्रिय हुए थे।दुर्भाग्य से बिपिन बाबुल की जोड़ी टूट गई और वे दोनों अलग रह कर काम करने लगे
इस कारण से उनका करियर भी बर्बाद हुआ और देखते देखते फिल्म इतिहास के पन्नों से उनका नाम गुमशुदा हो गया
विपिन बाबुल कौन थे कहाँ से आए थे और कहां चले गए? किसी पहेली की तरह यह सवाल भी अनसुलझे रह गए पर बाबुल की किस्मत थोड़े समय के लिए जाग उठी।
मुकेश के साथ उन्होंने चार फिल्मों में अकेले रह कर संगीत दिया चालीस दिन, रेशमी रुमाल, सारा जहाँ हमारा, और नकली नकाब, जैसे फिल्में लोकप्रिय रहे वे मुकेश के साथ सबसे अधिक काम करते थे और राजा मेहंदी अली खान से गीत लिखा करते थे
मैं दीवाना मस्ताना हो मुश्किल भेद मेरा जाना गर्दिश में होता रहे न घबराना प्यारे फूलों से रंगीन जमीन है काटो का गम भी यही हैं ये सभी गाने मुकेश ने बाबुल के लिए गए थे।
अब आप सोच रहे होंगे कि बाबुल से अलग होने के बाद बिपिन कहां चले गए दरअसल विपिन ने भी विपिन दत्ता इस नाम के साथ काम करना जारी रखा था।
इंटरनेट पर उनके नाम डायमंड किंग फिल्म है,अगर आप लोगों को अधिक जानकारी हो तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।
🎧 बिपिन बाबुल के यादगार गाने -
● मैं तुझको अगर एक फूल... सलाम-ए-
मोहब्बत (1955) तलत महमूद द्वारा
● चल धीरे-धीरे मतवाले... बादल और बिजली (1956) बाबुल, भूषण और कोरस द्वारा
● रात कितनी हसीन.. बादल और बिजली (1956) तलत महमूद, मुबारक बेगम द्वारा
● बिजली चमके...सुल्ताना डाकू (1956) मुबारक बेगम द्वारा
● तुम हो कहीं के... ताजपोशी (1957) आशा भोंसले द्वारा
● दुनिया मुझको पागल समझे... 24 घंटे (1958) द्वारा मुकेश
● हमें हाल-ए-दिल तुमसे कहना है... 24 घंटे - तलत महमूद, आशा भोंसले
🎧 बाबुल एकल संगीत निर्देशक के रूप में -
● गर्दिश में हो तारे... रेशमी रुमाल (1961) मुकेश द्वारा
● ज़ुल्फ़ों की घटा लेकर... रेशमी रुमाल (1961) मन्ना डे, आशा भोसले द्वारा
● जब छाये कभी सावन किम घटा... रेशमी रुमाल (1961) तलत महमूद द्वारा
● हैं ये ज़मीन हमारी... सारा जहाँ हमारा (1961) मुकेश द्वारा
● फूलों से रंगीन ज़मीन हैं... नकली नवाब (1962) मुकेश द्वारा
● हम जिसमें फ़िदा हैं... नक़ली नवाब (1962) आशा द्वारा भोसले
🎥 बिपिन बाबुल की जोड़ी की फिल्मोग्राफी -
1955 सलाम-ए-मुहब्बत, शाही मेहमान
1956 बादल और बिजली और सुल्ताना डाकू
1957 ताजपोशी
1958 चंदू और चौबीस घंटे
1959 बस कंडक्टर, 40 दिन और रात के राही
1960 डायमंड किंग
1961 रेशमी रुमाल
1962 नक़ली नवाब
1964 बागी शहजादा
1974 दावत
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